हिन्दी कविता
जो मीठे बोल होते हैं,
बड़े अनमोल होते हैं।
खज़ाना मुंह का खुलता जो,
तभी तो तोल होते हैं।।१
ये शक्ले ना बताती जो,
उन्हें तो शब्द ही कह दें।
कभी दिल चुप सा बैठा हो,
उन्हें वो भाव से भर दें।।२
है इंसा बस इन्हीं के बस,
इन्हीं की भाव में उलझा।
इन्हीं की ही तो खातिर वो,
बड़े है ताव से सुलझा।।३
ये शब्दों की तो रेला है,
जिन्हें हम जान सकते हैं।
कभी जो रह गये भटके,
उन्हें पहचान सकते हैं।।४
जो शब्दों ने हमारी बात को,
गंभीर कर रखा।
कहीं जो चूक हो गर तो,
उसे भी धीर कर रखा।।५
कहें जो कुछ अलग अंदाज़,
रखे जो सर के ऊपर ताज।
यही तो शब्द सद्गुण है,
दिला दे विप्र को भी राज़।।६
अलग है गुण, अलग माया,
न कोई भी, समझ पाया।
ये शब्दों की ज़ुबानी है,
बनें अपना भी पराया।।७
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